1.

हम कहाँ के दाना थे किस हुनर में यकता थे

बे-सबब हुआ ग़ालिब दुश्मन आसमाँ अपना…

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By. Paresh

2.

होगा कोई ऐसा भी कि ग़ालिब को न जाने

शाएर तो वो अच्छा है पे बदनाम बहुत है…

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By. Paresh 

3.

हवस को है नशात-ए-कार क्या क्या

न हो मरना तो जीने का मज़ा क्या…

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